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जब कागज पर कोई आकृति को उभेरी जाती है तो उसे कला कहते हैं लेकिन जब कुछ वस्तुओं जैसे कागज,प्लास्टिक, सजावटी वस्तुएं,मिट्टी इन सब के माध्यम से किसी आकृति को मूल रूप दिया जाता है तो उसे क्राफ्ट कहते हैं। बच्चों में आर्ट और क्राफ्ट के द्वारा पूर्व योजना बनाने की समझ बढ़ती है, क्योंकि आर्ट और क्राफ्ट में बच्चे जो बनाना चाहते हैं पहले उसकी भूमिका बनाते हैं। जैसे, कैसे उसकी शुरुआत हो, कैसा आकार वे चाहते हैं, किन रंगों से रंगेंगे और इस प्रकार से बच्चों में किसी भी कार्य से पहले उसकी योजना बनाने की समझ विकसित होती है। बच्चों के लिए कला थेरपी और चिकित्सा रूप में उन्हें शब्दों के उपयोग के बिना, अपने विचारों और विचारों को स्वतंत्र रूप से प्रदर्शित करने की अनुमति देती है ।
पुनर्वास चिकित्सा और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि कला मस्तिष्क तरंग पैटर्न, भावनाओं और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालकर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बढ़ाती है। कोई भी कला बना सकता है, और कला के कई अलग-अलग रूप हैं, कला का कोई भी रूप हमारे मस्तिष्क में एंडोर्फिन और डोपामाइन को बढ़ाने के साथ-साथ तनाव हार्मोन को कम करने में मदद कर सकता है। जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान हासिल करने में मदद करते हैं। इन अच्छे-अच्छे प्रभावों के कारण, कला आत्म-देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
अधिक बड़ी जगह और मैदान ना होने की वजह से हम सामने तौर के ही बच्चो के जरुरत और समझ के अनुसार इंडोर गेम्स, डांस गतिविधियाँ को प्राथमिकता देते है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधि उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि एक सामान्य बच्चे के लिए। खेल, डांस इत्यादि शारीरिक गतिविधियाँ में भाग लेने से बेहतर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, बेहतर सामाजिक कौशल, बेहतर कौशल, आत्मविश्वास बढ़ाने में और स्वतंत्रता विकसित करने में मदद मिल सकती है। खेल, डांस इत्यादि शारीरिक गतिविधियाँ के माध्यम से, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों महत्वपूर्ण सामाजिक कौशल प्राप्त करते हैं। यह विशेष बच्चो को प्रभावी ढंग से संवाद करने के साथ-साथ टीम वर्क और सहयोग और दूसरों के प्रति सम्मान का महत्व सिखाता है। बाकि तो शारीरिक लाभ पर कहा जाये तो बेहतर फिटनेस, संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार, वजन पर बेहतर नियंत्रण, स्वस्थ अस्थि घनत्व, मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
सामाजिक नैतिकता वे सिद्धांत हैं जो हमें अपने निर्णयों और कार्यों के माध्यम से सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में अन्दर पारंपरिक, मौजूदा नैतिक प्रथाओं, संस्कृति, भाषा और पृष्ठभूमि का सम्मान इत्यादि मूल्यों को विकसित किया जाना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमारे स्कूल में लगभग हर संभव त्यौहार को एक पाट्यक्रम की भाति लिया जाता है जैसे १५ औगेस्ट, २६ जनवरी, रक्षाबंधन, दिवाली, ईद, क्रिसमस, टीचर डे, गणपति उत्सव,जन्म्मास्तावी इत्यादि तय्हारो को मनाया जाता है । जिससे इन विशेष बच्चों में के अंदर आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहयोग और एक दूसरों के प्रति सम्मान का महत्व विकासित होगा। तभी इससे बच्चा के अपने परिवार के सदस्य, मित्र, समाज के विविध गतिविधियो में भाग लेगा। जाहिर है, सकारात्मक भीड़ और लोगों से घिरे रहने से, ये बच्चे स्वचालित रूप से सीखने की उच्चतम गुणवत्ता और जीवन क्षमता विकसित करेंगा।