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15 अगस्त 1999 को, डॉ. सुजाता बाजपेयी ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऑक्यूपेशनल थेरेपी, फिजियोथेरेपी और ऑर्थोटिक उपकरणों जैसे चिकित्सा क्षेत्रों में शहर का पहला चिकित्सा क्लिनिक श्री क्लिनिक शुरू किया। समय के साथ काम करते हुए उन्होंने पाया कि न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित बच्चों का इलाज जरूरी है, बल्कि उनके भविष्य को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए उनका शिक्षित और आत्मनिर्भर होना भी जरूरी है। फिर इसी सोच के साथ उन्होंने अपने डॉक्टर साथियों श्रीमती कविता पुजारा, श्रीमती कनक गोवर्धन, श्री शशांक मिश्रा, श्रीमती अंजलि चावड़ा, श्रीमती अक्षता देशकर, श्री मनीष मानेश्वर के साथ अपने विचार साझा किये और उनके सहयोग से श्री स्पेशल केयर की शुरुआत 19.09.2006 में केवल एक कमरे और महज चार बच्चे के साथ चालू किया। हालाँकि, शुरुआती वर्षों में बच्चों की संख्या में कोई खास बदलाव नहीं आया। बच्चों की शिक्षा और स्वावलंबन के लिए यह प्रयास अद्वितीय था। वैसे भी, यह स्पष्ट था कि इस विशेष विद्यालय के इस विशेष विचार को वास्तविकता में लाने के लिए सामाजिक जागरूकता की कमी, कर्मचारियों की कमी, उनके प्रशिक्षण के साथ-साथ चिकित्सा और सामाजिक सेवा क्षेत्रों से जुड़े लोगों को जोड़ना, वित्तीय संकट आदि और भी बहुत कुछ था, ऐसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ा ।
लेकिन ये टीम हारने वाली नहीं थी, संस्था के सदस्यों और हमारे शिक्षक प्रशिक्षकों की कड़ी मेहनत और लोगों के साथ हमारे निरंतर जुड़ाव और उनके सहयोग से आज यह संस्था मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रही है, और वर्ष 2017 से हमारी कुछ इकाइयों को समाज कल्याण संचालनालय - छत्तीसगढ़ से अनुदान प्राप्त हो रहा है, जिसके तहत हमारी संस्था सभी प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का बहुत आभारी है।
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श्री स्पेशल केयर सेंटर द्वारा संचालित इस स्कूल के माध्यम से आपके विशेष बच्चों को भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर आधारित गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने का संकल्प हैं। उनका पुनर्वास ही हमारी संस्था का मूल उद्देश्य है।
ये विशेष बच्चे सेरेब्रल पाल्सी, स्लो लर्नर, A.D.H.D., हाइपर, L.D.(लर्निंग डिसेबिलिटी), डाउन सिंड्रोम, ऑटिज्म आदि से पीड़ित हैं। मानसिक एवं शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे, जो हमारे समाज के मुख्य अंग है।
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